Friday, December 11, 2015

उम्मीद करें, बिहार में जारी रहेगा विकासवाद

उमेश चतुर्वेदी
राजनीति में एक कहावत धड़ल्ले से इस्तेमाल की जाती है और इस बहाने राजनीतिक दल अपनी दोस्तियों और दुश्मनी को जायज ठहराते रहते हैं। वह कहावत है – राजनीति में न तो दोस्ती स्थायी होती है और ना ही दुश्मनी। चूंकि लोकतांत्रिक समाज में राजनीति का महत्वपूर्ण लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ लोककल्याण ही हो सकता है, लिहाजा इन स्थायी दोस्तियों और दुश्मनियों का सिर्फ और सिर्फ एक ही मकसद हो सकता है – राष्ट्रीय हित के परिप्रेक्ष्य में जन कल्याण। लेकिन क्या बिहार की राजनीति में 1993 के पहले तक रंगा और बिल्ला के नाम से मशहूर लालू और नीतीश की जोड़ी को मौजूदा परिप्रेक्ष्य में लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर तौला-परखा जा सकता है?

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