Sunday, April 5, 2009

मुन्नाभाई से नहीं, लोकतंत्र से हुआ इंसाफ


राजकुमार पांडेय
संजय दत्त को चुनाव लड़ने से रोक कर न्यायपालिका ने अपना काम बेहतर तरीके से निभाया है। न्यायपालिका ने इस तरह से साफ संदेश दे दिया है कि वो किसी को भी बख्शने वाली नहीं है। चाहे उसका पारिवारिक बैकग्राउंड कितना भी देशभक्ति वाला हो। न्यायपालिका के इस फैसले के बाद अब व्यवस्थापिका और उसके नुमाइंदों को सोचना होगा। हमारे देश के कानून ऐसे हैं जिसके तहत संजय दत्त को तो चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है, लेकिन दाऊद भाई अगर भारत के जेल में बंद भी हो तो उनको कोई चुनाव लड़ने से नहीं रोक सकता। अबू सलेम छोटा राजन या फिर और दूसरे तमाम अपराधी चाहे जितना राष्ट्र विरोधी काम कर रहे हों उन्हें तब तक चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता, जब तक कि उन पर मुकदमा चला कर उन्हें सज़ा न दे दी जाय। शाहबुद्दीन को चुनाव लड़ने से कोर्ट ने रोका तो उन्होंने अपनी पत्नी को मैदान में उतार दिया। और तो और लालू प्रसाद यादव बाकायदा उनके प्रचार में भी लगे हुए हैं।
नाम फौरी तौर पर एक समुदाय विशेष से आ रहे हैं इसका कत्तई ये मतलब नहीं निकालना चाहिए कि सिर्फ उसी समुदाय के लोग ही अपराधी है। दरअसल ऐसे तमाम हिंदू अपराधी हैं जो जरायम की अपनी दुकान के साथ साइ़ड बिजनेस के रूप में राजनीति का धंधा भी चला रहे हैं। उन्हें चुनाव लड़ने बिल्कुल नहीं रोका जा सकता। बल्कि राजनीतिक दल भी उन्हें चुनाव में उतार कर अपनी एक सीट पक्की कर लेते हैं। जनता से अपेक्षा की जाती है कि उनके बीच कोई भगत सिंह पैदा हों और वे ही इन गुंडे और बदमाशों को वोट न दे।
जब बात जनता की चली तो इसे भी समझ लेना जरूरी है कि जनता क्यों इस तरह के लोगों को वोट दे देती है। ग़ाज़ीपुर इलाके से मुख्तार अंसारी जनप्रतिनिधि रहे। अब वहां किसी के भी घर में शादी व्याह हो, या किसी दूसरे मौके पर बिजली की जरूरत होती थी तो बिजली नहीं कटती थी। वजह ये थी कि मुख्तार भाई सीधे इंजीनियरों को फोन कर देते थे, फला तारीख को इतने से इतने बजे तक बिजली नहीं जानी चाहिए। किसकी मजाल कि भाई का हुक्म टाल दे। किसी को पानी के टैंकर की जरूरत पड़ती थी तो भी भाई का हाथ उसके साथ होता था। आम आदमी को इससे ज्यादा की जरूरत नहीं और दूसरी तबीयत वालों के तो भाई लोग मसीहा हैं ही। फिर साधारण आदमी से ले कर असाधारण बदमाश तक को मुख्तार भाई का नेतृत्व शूट करता है।
अब नेताजी की बात कर लें। नेता जी नेता बनने से पहले किसी तरह दो जून रोटी का जुगाड़ करते थे। अब वे पांच तारा सुविधाओं के हक़दार हो गए हैं। उनका क्लास बदल गया है। उन्हें किसी भी आम आदमी से बात करने की फुर्सत नहीं। अगर वे मंत्री हो गए तो फिर कमीशन के दलालों के साथ मीटिंग करने से उन्हें फुर्सत ही कहां हैं जो वे किसी साधारण आदमी की बेटी की शादी में एक टैंकर दिला सकें। या फिर किसके घर फेरे अंधेरे में हो रहे हैं, इसकी जानकारी भी वो ले पाएं।
तो इस हालत में किसी आम आदमी को जरूरत क्या है कि उसे मुख्तार भाई या शाहबुद्दीन की जगह छात्र संघ में उत्पात मचा कर राजनीति में आए किसी व्यक्ति को वोट दे।
फिर भी ऐसा नहीं कि देश में अब संजीदा राजनीतिज्ञ न रह गए हों। हैं तभी तो जो भी सही व्यवस्था चल रही है। उन्ही संजीदा लोगों को सोचने की जरूरत है कि अपराधियों को किस तरह से चुनाव में उतरने से रोका जा सके। संजय दत्त चुनाव लड़ें या न लड़े इससे देश को कुछ भी फर्क नहीं पड़ता। अलबत्ता इस फैसले के जरिए जो संदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया था, उसे समझने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट भी मुख्तार और अतीक जैसे या फिर काल्पनिक हालात में जाएं तो दाऊद भाई जैसों को फिलहाल तो चुनाव लड़ने से नहीं रोक सकता। इन्हें रोकने के लिए नए सिरे से कानून बनाने होंगे। वो भी कानून ऐसे हों जिनका किसी भी तरह से दुरुपयोग न हो सके। क्योंकि आज कोई भी कानून बनने के पहले ही उसके दुरूपयोग के रास्ते खोजे जाने लगते हैं। पहले भी कानून बनाने वालों ने ऐसा ही भोलापन किया। उन्हें अंदेशा कम ही था कि आने वाले वक्त में राजनीति और समाज की ये दशा होगी। उन्हें इसका इल्म नहीं हो पाया था कि कोई राज्यपाल भी अपने पद का किस हद तक दुरुपयोग कर सकेगा। भाई महावीर से ले कर रमेश भंडारी और भी बहुत से कांग्रेसी राज्यपालों ने इसके नए रिकॉर्ड बनाए। सबब ये है कि अब बहुत सोच समझ कर उन कानूनों को बनाने का वक्त आ गया है कि दागदार लोग लोकतंत्र के यज्ञ से दूर रहे और इसकी पवित्रता बरकरार रहे।

2 comments:

  1. लगता है कि किसी इंजीनियर को हड़काकर कहना कि इस गाँव की बिजली इस दिन नहीं कटनी चाहिये बहुत गम्भीर मामला है। इसकी गम्भीरता को जनता नहीं समझ पाती है और आप भी लगता है नहीं समझ सके हैं। यह वही रोग है कि किसी की जवान लड़की का अपहरण कराओ और फिर उसके पिता के फरियाद करने पर उसे छुड़ाओ भी। और अंधी जनता के 'हीरो' बन जाओ।

    वस्तुत: ये गुण्डे ही रोग हैं किन्तु गलती से लोग उन्हें दवा समझ जाते हैं।

    ReplyDelete
  2. लोकतंत्र अब अपराधी-तंत्र में बदलता जा रहा है. जनता अभी भी नहीं जागेगी तो कब जागेगी...मेरी सभी प्रबुद्ध-जनों से अपील है कि वोट जरुर दें... आपका एक वोट ही फिर से लोकतंत्र की बहाली में अहम् भूमिका निभाने वाला है...कहीं बाद में पछताना न पड़े...

    ReplyDelete

My Perspective: Futile Use of Political Power: Vijay Sanghvi

My Perspective: Futile Use of Political Power: Vijay Sanghvi Sages have said for ages that political power and morality cannot walk toge...